Menu
header photo

Dhruvaa - The Sanskrit Band ||ध्रुवा|| Welcome to the Official Web Portal.




Call us

+91 940 7172 999

Dhruvaa - The Sanskrit Band

“ध्रुवा एक विचार है, एक सेतु है उस पीढ़ी अंतराल का, जिसमें एक तरफ हमारे पूर्वज हैं, जिनके पास भारतीय ज्ञान परंपरा की धरोहर थी; संस्कृत के ग्रन्थ थे, वेद-पुराण-उपनिषद् का वे पाठ करते थे, उसकी समझ रखते थे, तो दूसरी तरफ है आज की युवा पीढ़ी, इन सबसे लगभग (सभी नहीं) अनभिज्ञ | ऐसे में इस विचार का जन्म हुआ और भारत की संस्कृति, जो कि स्वयंप्रकाशित है; फिर एक अभिनव रूप में प्रस्तुति को तैयार है |”

 

ध्रुवा - कुतप / वृन्द / Band
ध्रुवा की प्रेरणा द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व में रचित नाट्यशास्त्र के आचार्य भरतमुनि हैं | उस काल में ध्रुवा गान एवं जाति गान का प्रचलन था | राग गान की परम्परा परवर्ती काल में विकसित हुई | भरतमुनि ने स्वरों से संस्कारित निबद्ध पद या गीत को ध्रुवा कहा है | जिसमें वर्ण, अलंकार, लय आदि निश्चित रूप में परस्पर सम्बद्ध रहते हैं | नाट्यशास्त्र में गायन एवं वीणा-वंशी-मृदंग आदि वाद्यों के वादन के समवेत प्रयोग को ‘कुतप’ की संज्ञा दी | वर्तमान बैंड का मूल रूप यही ‘कुतप’ है (नाशा. २८वां एवं ३२वां अध्याय ) |
परिकल्पना
प्रेम, आनंद और शान्ति मानवता के लिए अनिवार्य मूल्य हैं |इसी से भक्ति एवं मुक्ति, दोनों संभव है|इन्हीं जीवन मूल्यों की सर्वथा नवीन व्याख्या प्रस्तुत करता है ध्रुवा | जिसमें सनातन धर्म-संस्कृति, दर्शन, भाषा, अध्यात्म एवं अपनी परम्पराओं के प्रति गहरी आस्था एवं प्रेम के विरत रूप के दर्शन होते हैं | संस्कृत भारतीयता की समग्र परिभाषा है | संस्कृत का अर्थ ही है संस्कार युक्त | अतः ध्रुवा रुपी इस नवाचार के लिए संस्कृत भाषा को चुना गया | युवा पीढी में इसी भारतीय चेतना का पुनराविष्कार के लिए ध्रुवा ने यह रूप धारण किया है | ध्रुवा के इस विचार का जन्म बसंत पंचमी, 24 जनवरी, 2015 को हुआ |
प्रयोग
संगीत और संस्कृत का संबंध आत्मा और शरीर के संबंध जैसा है | संगीत मध्यमा है; संस्कृत वैखरी है | भारतीय शास्त्रीय एवं पारंपरिक संगीत के ताने-बाने में गुम्फित वैदिक ऋचाएँ, संत-कवियों के दार्शनिक स्तोत्र-गीत आदि की प्रस्तुति में एक ओर जहाँ परम सत्ता से संवाद स्थापित करने का प्रयास होता है, तो दूसरी ओर सुभाषितों में लोकमंगल और वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना भी प्रतिध्वनित होने लगती है | साथ ही आधुनिक गीतों में आम-आदमी की वेदना का काव्य अनेक रागों और रसों से आप्लावित हो ‘जन-जन का गान’ बन जाता है | यही तादात्म्य ध्रुवा की उडान को और ऊँचा बना देता है |
प्रसिद्ध संगीत-रचनाएँ
स्वस्तिवाचन – वैदिक गान | गजाननं गजाननं – आद्य शंकराचार्य | भज गोविन्दं – आद्य शंकराचार्य | मधुराष्टकं – वल्लभाचार्य | शिवताण्डवस्तोत्र – रावण | अच्युतं केशवं (अच्युताष्टकं) - आद्य शंकराचार्य | गोविन्द दामोदर माधवेति – विल्वमंगलाचार्य | शिवपञ्चाक्षरस्तोत्र - आद्य शंकराचार्य | गंगाष्टकं – आद्य शंकराचार्य | नर्मदाष्टकं – आद्य शंकराचार्य | तव न जाने हृदयं (प्रेमगीत) – महाकवि कालिदास | वंदेमातरम् – बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय | मध्यप्रदेश गान – आ. श्रीनिवास रथ | पारमये धीवर हे ! – आ. राधावल्लभ त्रिपाठी | दूरे तीरं पारितो नीरं - आ. राधावल्लभ त्रिपाठी | नर्मदा मैया – जागरण गीत | झीनी झीनी बीनी चदरिया – कबीरदास | मन लागो मेरो यार फकीरी में – कबीरदास | प्रभु मोरे अवगुण चित न धरो – सूरदास |
प्रस्तुतियाँ
राष्ट्रीय टेलीविज़न एवं आकाशवाणी के विविध चैनलों से समय समय पर प्रसारण | चार वर्षों में भारत के विविध प्रतिष्ठित समारोहों में लगभग 250 से अधिक प्रस्तुतियाँ | जिनमें प्रमुख हैं – कुम्भ २०१९ – प्रयागराज | लोकमंथन २०१८ – राँची | साहित्योत्सव २०१८ – भोपाल | कालिदास समारोह – उज्जैन | सिंहस्थ महाकुम्भ – उज्जैन | बसंतोत्सव – दिल्ली संस्कृत अकादमी | विश्व पुस्तक मेला २०१६ – नई दिल्ली | नर्मदा सेवा यात्रा – म. प्र. | एकात्म-यात्रा – म.प्र. | हरयाणा साहित्य संगम – पंचकुला | स्थापना दिवस समारोह NCERT – नई दिल्ली | संस्कृत दिवस – राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान - नई दिल्ली | उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा कलाग्राम एवं टैगोर थिएटर चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं जालंधर में आयोजित प्रस्तुतियां प्रमुख हैं | जिसमें म. प्र. शासन के बृहद सांस्कृतिक अनुष्ठान ‘एकात्म – यात्रा’ में 35 दिनों में 180 प्रस्तुतियां देकर ‘ध्रुवा बैंड’ ने एक रिकॉर्ड कायम किया है |
कलाकार
डॉ. संजय द्विवेदी – संगीत निर्देशक एवं मुख्य गायक | श्रीमती ज्ञानेश्वरी द्विवेदी – सह-गायिका | वैभव संतोरे – सह-गायक | स्वप्निल बागुल – तबला वादक | तुषार घरत – पखावज वादक | राकेश सातनकर – बांसुरी वादक | यशवंत राव – वायलिन वादक| पुष्पराज सिंह – एकॉस्टिक गिटार वादक | विजय गौर – बेस गिटार एवं साउंड इंजीनिअर |

 


04 years, more than 250 Concerts, across India

873;400;2d9162fbc4ef788231bb81b7c5e22aef305699a5873;400;6b2d25748675b861ad20e67bbf603c85ff1bf7e0873;400;80b7fce9e21719e6990e1bcd7de0222ee9c94945873;400;3c98fff108807be14181304ec14a056771d9b784873;400;76bca52248c2fc8af31bdfa57a608d051c6a51e7873;400;215e1fb0e9babf3d7ec311a5cf1a0fc3b814e819873;400;f04bf9463a3906c902f7c446255c7c2e4cadcb5d873;400;e45b090a0e1a212068c43ec89e326ec9b53dc099873;400;8a9723f55e332bbaa959e6b4a05ab741ea2a82d5873;400;87a093a3a0cd7f303624db70826e775dfc395dd7

Video Gallery

                                                                       Achyutam Keshavam ( अच्युताष्टकं )

 

Bhaja Govindam ( भज गोविन्दं )

Madhurashtakam ( मधुराष्टकं )

Love Song by Kalidas ( तव न जाने हृदयं )

Interview on DD NEWS